लफ्ज़ कम पड़ गए तो लब चूम लिए
कुछ बातें होती हैं ख़ामोशी से
वो पल जो गुज़ारे तेरी आग़ोश मे
बातें
होती है तेरी सरगोशी से
आज जो तेरा दीदार हो गया
‘इश्क’ हो गया अपनी मदहोशी से
तेरी उम्मीद है पर तेरा इंतज़ार नहीं
इक सुकून मिलता है इस सरफरोशी से
ishQ
Friday, 13th April 2012

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