Saturday, April 20, 2013

ज़िन्दगी की खूबसूरती

- ज़िन्दगी की खूबसूरती -

ज़िन्दगी के गुलशन में, रिश्ते फूल हैं 
कुछ रिश्ते होते हैं असल फूलों की तरह.....मुरझा जाते हैं मगर खुशबू छोड़ जाते हैं.

और कुछ रिश्ते होते हैं जैसे कागज़ के फूल ....शायद जिंदगी भर सजावट रहेंगे 
लेकिन महसूस न होंगे 

पर असल फूलों को मुरझाने नहीं देना चाहिए
इन फूलों की रंगत ही गुलशन को गुलशन का नाम देती है 
इन फूलों की खुशबू ही गुलशन महकाती है

कुछ फूल खुद फ़ना हो के भी, किसी किताब में छिप कर
अपनी याद से दिल को मेहकातें है... कुछ फूल कुचल कर भी, इत्र बन के महका देते हैं ज़िंदगी
कुछ फूल कागज़ के होकर भी खूबसूरती की मिसाल बन जाते हैं
खुशबू नहीं देते पर आलम रंगीन करते हैं....महसूस नहीं होते पर एहसास देते हैं होने का

पर क्यूँ मुरझा जाते हैं फूल?
क्यूँ चाहिए कागज़ के फूल?

हर बार माली से ये सवाल पूछा....हर बार वो मुस्कुरा के चला जाता
एक बार बाग़ में बैठा अकेला कुछ सोचते हुए, बेख़याली में माली को अनदेखा कर दिया मैंने

कुछ देर बाद माली खुद पास आया और पूछा - आज कोई सवाल नहीं पूछोगे?
तब ही एक फूल मुरझा के गिरा ज़मीन पर... और मुझे अपना जवाब मिल गया
मैंने मुस्कुरा कर कहा - नहीं! इस फूल ने गिर कर सब बयाँ कर दिया...

मैंने एक दफा तुमको नहीं देखा, तो तुम बेचैन हो गये… और देखो
तुमने इस फूल को जाने कब से नहीं देखा और ये मुरझा गया!

फूल, कागज़ के हों या असल - रिश्ते, जाने अनजाने अनदेखा ना करो...प्यार से सींचो, नर्म भावनाओं से संवारो....और बटोर लो सारे रंग, खुशबू और ज़िन्दगी की खूबसूरती ...!!

-ishQ

20th April 2013

Tuesday, April 16, 2013

haseen wardaat



kuch tto baat hogi ke baat ho rahi hai
be-sabab jo ye mulaaqat ho rahi hai

yakaayak se rishtae yu nahi bantae
haule haule hi shuruaat ho rahi hai

ishq isi ummeed se khush hai ke kahaani uski
uske sanam ke haathon mashhoor ho rahi hai


hum uss safar mae hain jahaan haqeeqat bhi fasaana hai
har modh pe ik haseen wardaat ho rahi hai

ishQ

17th April 2013

Tuesday, April 09, 2013

thoda hansaa gaya kuch rulaa gaya




aarzoo ka baadal bhigo ke chalaa gaya
ik aks dil ki dewaar moum ki tarah galaa gaya

sulagti nigaahon ki aanch ki tapish mae
undekhaa jhonkaa badan ko jalaa gaya

kuch din rahaa, thoda qareeb aaya
thoda hansaa gaya kuch rulaa gaya

ulfat aur junoon ki sarhad pe rootha hua sanam
“ishQ” hi hai vo bol ke jo bhi buraa bhalaa gaya


-ishQ
10th April 2013