हमको सुकून, तुमको यकीन आया नहीं
तुमने पूछा नहीं, हमने बताया नहीं
किसी को हमसे शिकायत है आज कल
न जाने क्यों कोई दावा उठाया नहीं ?
उनको फुर्सत है ज़माने भर से गुफ्तगू की
बस हमारा ही ख़याल आया नहीं
साक़ी को गिला रहा हमने उठा लिया पैमाना
हमे रंजिश रही उसने पिलाया नहीं
इतने भी नादान नहीं तुम, 'इश्क्ज़ादे"
पर न वो समझे, और तुमने भी समझाया नहीं
ishQ
11th June 2012

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