Monday, June 17, 2013

इश्क़ संभल गया



वो याद आए, मौसम बदल गया
पानी बरसा और जिस्म जल गया

ख़यालों मे रात कट गई
सोचते हुए दिन निकल गया

मुद्दतों किया इंतेज़ार जिसका
आप मिले, गुज़र वो पल गया

नज़र मिली, नज़र झुक गई
वो मुस्कुराए, दिल बहेल गया

इक कसक उठी आरज़ू-ए-दिल से
इक कसम याद आई, इश्क़ संभल गया

एक बूँद



हंसता-खिलखिलाता, बेहिचक इठलाता,
धरती से जोड़ते हुए, बूँदों का नाता,
अपनी ही धुन मे चला, एक पागल,
चला अपनी ही ज़िद पे, एक बादल….

थोड़ी नमी, थोड़ा पानी लिए,
थोड़ा सा बचपन, थोड़ी जवानी लिए.
ज़रा सा बरसता, गरजता हुआ,
तंग करता हुआ, उड़ान भरता हुआ,
कभी हवा का धक्का, कभी बूँदों का भार,
कहीं गरज के डराना, कहीं हल्की सी फुहार.
बादल मस्त उड़ा जा रहा था, कोई भी उसे ना रोक पा रहा था....

इधर बादल सोच मे था,
क्या और बादलों से मिल के बनाए काफिला एक बड़ा सा?
या अकेले ही बहे, ओढ़ के आसमान की चादर?
नादान बादल इसी असमंजस मे पड़ा था.

बिन धूप लगे भी था रंग बादल का सांवला !
और सफेद चमकीले हीरे लूटा रहा था बावला !


बारिश रुक गयी, वो बादल पानी सा बह गया
पर गाल पे मेरे उसकी याद मे एक बूँद रह गया



इश्क़ अब तक हुआ नही



नज़रे मिली पर इशारा मिला नही
बेरूखी हुई पर हुआ कोई गिला नही
कोई हरक़त जिसपे इक जूस्तजू आए
उसके आने से पहले उसकी खुश्बू आए
चली अब तक है कोई हवा नही......

बिन हवा ही आँचल उड़ा
बिन पूछे दिल उसकी ओर मुड़ा
ओस से गीली घांस है जैसे
सोच भीगी है उसके आस से ऐसे
हटा अभी तक है इकरार का धुआ नही.....

उसने अब तक दिल को छुआ नही
इश्क़ अब तक हुआ नही
पर फ़ासले कम हो रहे हैं
सपने आँखों को चुभो रहे हैं
माँगी अब तक है कोई दुआ नही.....

मैं बे-फ़िक्र हुआ



आपकी हस्ती का कुछ ऐसा असर हुआ
आपके साथ आसान हर सफ़र हुआ

जाने कैसे इतना वक़्त गुज़र गया
हर इंतेज़ार आपकी वजह से मुख्तसर हुआ

आप हो तो कैसे हर चीज़ सुलझ जाती है
इस बात का ताज्जुब मुझे अक्सर हुआ

क्योंकि आप हो ज़िंदगी मे मेरी
मैं हर फ़िक्र से बे-फ़िक्र हुआ

सरहद



कोई ज़िंदगी मे आया है बहार ले के
इनकार की सरहद पे इज़हार ले के

ना गहराई का इल्म है, ना दरमियाँ का अंदाज़ा
दिल का क्या करूँ जो चला है दरिया पार ले के

उस दिन हुआ असर सुरूर-ए-मैखाने का
साक़ी जब आया आँखों मे ख़ुमार ले के

सर्द हवा, प्यासी नज़र, टूटे बोल
जा रहे हैं मेरी इलतेजा बार बार ले के

एक वो हैं जो छुपा रहे हैं उल्फ़त
एक हम हैं खड़े चेहरे पे इश्क़ का इशतहार ले के

फुरक़त



आँखों की जो हरक़त हो गयी है
मासूम दिल की मुसीबत हो गयी है

उसका एक ख़याल इस भीड़ मे आया
हमे दुनियादारी से फ़ुर्सत हो गयी है

वो मुस्कुरा के जो इनकार कर भी गया
ये रुसवाई हमारी शोहरत हो गयी है

जश्न-ओ-मीना-ए-महफ़िल की आदत छूट गयी
हमे तन्हाई-ओ-खामोशी से मोहब्बत हो गयी है

कुछ फ़ासले हैं जो तय करने हैं इश्क़
ना-मुमकिन सी अब ये फुरक़त हो गयी है

यकीन



जाने क्यों वो मुझपे यकीन कर रहा है
अंजाने ही मगर मेरी हस्ती शिरीन कर रहा है

वो मासूम आँखें, वो हसीन चेहरा
दानीस्ता दिल एक गुस्ताख़ी हसीन कर रहा है

कुछ भी कहा नही है और दिल का ये आलम है
ख़ामाखा मौसम-ओ-मिज़ाज रंगीन कर रहा है

बिना मेरी इजाज़त, बड़े मुयस्सर अदाओं से
मेरी ज़िंदगी मे दाखिल इक माह-जबीन कर रहा है

चाहत को जुनून, उसकी तिश्नगी को सुकून
दिल इश्क़ को अपना ईमान-ओ-दीन कर रहा है

इश्क़ पे एहसान



रूह सूखी, दिल परेशान है
भीगे बादलों मे चाँद भी हैरान है

ताकते हैं रात भर आसमान को
टूटे तारे देखना कितना आसान है

उंगली थामे ही निकला था चाँद
जाने रात शाम से क्यों अंजान है?

किरदारों से ज़्यादा दिल ना लगाना
लंबा इंतेज़ार, छोटी दास्तान है

अजनबी शहर अपना, अपने अजनबी हो गये
हर मोड़ अपने रास्ते की पहचान है

दिल मे आग लगा के दामन भीगो गया
बारिश का इश्क़  पे एहसान है

तू मेरी बुनियाद है - for my school



तू मेरी खुदी, तू मेरी बुनियाद है
तेरी सीख ही मेरी जाएदाद है

हर दीवार पे तस्वीर है
हर शाख पे कोई कहानी लटकी है
हर मोड़ पे एक हँसी की गूँज है
हर कोने मे एक शैतानी अटकी है
तेरा हर दिन, तेरी हर रात मुझे याद है
तेरी सीख ही मेरी जाएदाद है....

हर शक़्स तेरे गाँव का मुस्कुराता ही मिला है
हलचल जश्न की कभी थमी नही
हर घर का दरवाज़ा हर एक के लिए खुला है
खुशी की थी कोई कमी नही
तेरी वादियों का बीता कल करता मेरा आज आबाद है
तेरी सीख ही मेरी जाएदाद है....

तेरी खुली बाहें, तेरा खुला आसमान
वो सूखे पत्ते, वो गीला मैदान
तेरी हरी घांस पे ओस की बूंदे
लेना बारिश का मज़ा अपनी आँखें मून्दे
तेरी वजह से मेरी सोच आज़ाद है
तेरी सीख ही मेरी जाएदाद है....


मेरे आने से पहले तू था वहाँ
तू वहीं मेरे जाने के बाद है
मैं जितना दूर चला जाता हूँ
तू आता मुझे उतना ही याद है


रोते हुए, हंसते दिल से है फरियाद अपनी
यूँ ही बाँटता रहे तू जायदाद अपनी

उस शक़्स ने



कुछ यूँ सताया है उस शक़्स ने
भूला एहसास जगाया है उस शक़्स ने

जब उंगलियाँ उठ रही थी हम पे
हाथ बढ़ाया है उस शक़्स ने

हम आस लगाए बैठे थ अंधेरे मे
सहेर को बुलाया है उस शक़्स ने

इक नया दर्द मिला है उसके मिलते ही
इक पुराना ज़ख़्म बुझाया है उस शक़्स ने

महफ़िल मे बचते बचाते ज़माने से
इश्क़ से मिलाया है उस शक़्स ने

ittefaaq



Soch rahi ruki har waqt uske liye
Par apne hi dil pe rahe sakht uske liye

Hazaar koshishon se bhi na hua ikraar-e-haal
ik zikr pe bhi thami saansein yaklakht uske liye

Ik shaam muddaton baad mila vo ittefaaq se
Dhal chuka tha din, guzar chuka tha waqt uske liye

Mulaaqaat pe hanse bhi, kuch roye bhi, izhaar bhi hua
Afsos-e-ishq hi raha kambhakt uske liye

तहसील



साथ उसका मिला तो दिन और भी जमील हो गया
मेरा उजड़ा गाँव ज़ीनत-ए-तहसील हो गया

खुश्क मौसम मे निकला था सफ़र को
इक नज़र उठी और आलम तब्दील हो गया

कल तक रखता था अदावत मेरे खिलाफ
वो खुद आज इश्क़ का वकील हो गया

gunaahgaar



tum tto chup ho ye nazar izhaar na kar de
dekho kahin ruswaa sar-e-bazaar na kar de

yun safaai dogae agar tum sabke aage
duniya tumhe gunaahgaar qaraar na kar de

lafzon ke lehje badle badle se lagte hain
hawaa ka naya rukh kahin mausam bezaar na kar de

ye jo itna parhez kiya hai armaan-o-iraadon se
kahin ishq jeena dushwaar na kar de

Ab vo mujhse baat nahi karta


Ab vo mujhse baat nahi karta
Karta bhi hai tto aise jaise kuch hua hi nahi
Par kuch tto hua hai ke baat nahi hoti
Hoti bhi hai tto vo baat nahi hai...

Roothna uski aadat mae shaamil hai
Aur hum khudgarz humesha se hi thae 
Mushkil se basti-e-saahil dikhti hai jab bhi
Kashti dariya se zyaada hawaa ka rukh pakad leti hai
Ishq ab bhi hai shaayad par hoti mulaaqt nahi hai....

Lafzon se zyaada sannatae bolte hain darmiyaan
Garajtae hain adheron mae soch ke baadal
Barsaat rehti hain aankhon mae
Barasti bhi hai kabhi kabhi
Raat hoti hai par ab vo raat nahi hai...

Wednesday, June 12, 2013

इश्क़ अब तक हुआ नही

नज़रे मिली पर इशारा मिला नही
बेरूखी हुई पर हुआ कोई गिला नही
कोई हरक़त जिसपे इक जूस्तजू आए
उसके आने से पहले उसकी खुश्बू आए
चली अब तक है कोई हवा नही...

बिन हवा ही आँचल उड़ा
बिन पूछे दिल उसकी ओर मुड़ा
ओस से गीली घांस है जैसे
सोच भीगी है उसके आस से ऐसे
हटा अभी तक है इकरार का धुआ नही...

उसने अब तक दिल को छुआ नही
इश्क़ अब तक हुआ नही
पर फ़ासले कम हो रहे हैं
सपने आँखों को चुभो रहे हैं

माँगी अब तक है कोई दुआ नही...

Friday, May 24, 2013

रुके से कदम



दिल की बात दिल मे ही रह जाए तो बुरा
हालात मासूम नज़र कह जाए तो बुरा

मंज़ूर है इंतेज़ार मे पत्थर हो जाएं आँखें
लुत्फ़-ए-दीदार मे अश्क़ बह जाए तो बुरा

मलाल ज़ाहिर ना कर पाओ तो अच्छा
शुक्रियादा करना रह जाए तो बुरा

खुश्क मौसम, खामोश वादी, रुके से कदम
मौजूदगी उसकी हवा कह जाए तो बुरा


ishQ
21st May 2013

Thursday, May 23, 2013

दिल-ए-बेईमान



इक उम्र बाद बैठे मेरे मकान के कोने मे
तुम्हारा ज़िक्र आएगा मेरी दास्तान के कोने मे

पलकें उठी, दिल चल दिया हसरतों के काफिले लिए
मेरी जान अटकी रही तुम्हारी मुस्कान के कोने मे

तुम्हारे लबों की आखरी जुम्बिश की इनायत रही
इक तीखापन रह गया मेरी ज़बान के कोने मे

साल गुज़रे, मौसम बदले, दीवारों के रंग उतर गये
इक फूल खिला किया हर साल बयाबान के कोने मे

अब भी नज़र झुकती है, मुस्कराता हूँ हसीन चेहरों पे
ज़रा सा इश्क़ बाकी है शायद दिल-ए-बेईमान के कोने मे


-ishQ
23rd May 2013

Monday, May 20, 2013

Tum mere liye sab kuch ho - Ma - 2013




Kisi ne kisi ko pyaar se bulaaya tto tum yaad aayi
Tumhaari hi daant yaad aayi jab kisi ki daant suni
Kuch naya mila tto laga kaash tum hoti yehaan
Kuch khoya tto pata tha tum hoti tto khoj deti

Bukhaar ho tto tum dawaa
Bijli chali jaati thi tto tum hawaa
Imtehaan ke waqt tum meri ghadi
Galti kii tto tum hi thi chhadi
Mujhe chot lagi tto tumhaara seena tha
Meri har mehnat dar-asal tumhaara paseena tha

Tumko jaane-anjaane maine bas sataaya hai
Phir bhi tumhaara pyaar badhtaa hi paaya hai
Jaane tum kis mitti ki bani ho?

Kaise tum mere saare ehsaas bin kahe jaan leti thi?
Meri har zidd tum bas yu hi maan leti thi !
aisa kabhi nahi hua ke maine kuch maanga
aur tumne la ke nahi diya
na jaane ye jadoo har baar
tumne kaise kiya?

Tum pe likhna chahoon tto likhta hi jaunga
Ruku kaise, kahaan tumhaara anth paunga?

Tumne di hai meri awaaz mujhe
Tumhaari godh mae hi mili hai har saans mujhe
Tumse hi main, meri soch, meri har baat hai
Kyonki, tumse hi meri shuruaat hai

Tum meri duniya ka sach ho
Tum mere liye sab kuch ho.






galat-fehmi



kabhi kabhi yu bhi mulaqaat hoti hai
beech ki kaamoshi hi baat hoti hai

kaanch se khwaab, moum si ummeedein
dil ki mitti pe dard ki barsaat hoti hai

kitni bhi udaan bhar le awaara dil
mutthi aata utna hi aasmaan jitni bisaat hoti hai

kuch nazdeekiyaan bayaan hoti hain yu
qaatil ke haath hi jaan-e-hayaat hoti hai

kisi galat-fehmi mae mat rehna “ishQ”
har kahaani ki intehaan ik nayi dastaan ki shuruaat hoti hai

Aakhri rukhsat




Barsi yu baarish bhar gaya dil mera
Garje baadal darr gaya dil mera

Humne tto issi bharose kuch na kahaa
Tere pass nahi tto kidhar gaya dil mera

Aakhri rukhsat pe tumhe chhodha uss mod tak
Jahaan talak gayi meri nazar gaya dil mera

Jo kabhi hua nahi usae bhi haqeeqat maan loon
Aaj tumhaari badaulat seekh ye hunar gaya dil mera